Friday, October 19, 2018

शक्ति

सब शक्तिया खत्म हो जाएगी
एक दिन,
सिवाय सहन शक्ति के

-अविनाश जोशी

मुस्कराहट

कभी कभी यूँही मुस्करा दिया करो क्योंकि
रोने से कौन सुनता है आजकल

-अविनाश जोशी

रम्मत

रमते रमते
खेल खेल में
सब कुछ खोना
अच्छा लगता है

डरता हूँ
असली ज़िन्दगी के खेल में
रमते रमते रम्मत में
कोई धोखे से पटखनी नही दे दे

बस  इसी बहाने
आजकल
जब भी किसी से मिलता हु
कोशिश करता हु
कुछ देर
नज़र से नज़र मिला के
हम ख्याल हो जाऊं।।

-अविनाश जोशी

जुदाई

तुम तो हमेशा हमसे जुदा हो
फिर यह कैसा सन्नाटा है

सन्नाटे से सन्नाटे की बात तो होती होगी
इन बातो में फिर से ऐसा वीराना सा क्यों है

सहरा  में वीराना होना आम नज़र आता है
फिर भी  इस सहरा  में बगिया की आस सी क्यों है

पुष्प टहनी तना और  पेड़ सब  सब्ज़ है
फिर मेरे जीवन में अब प्यास सी क्यों है

सरसराहट पत्तो की जीवन में  रस घोल देती है
फिर भी तुम जुदा हो ऐसी बात क्यों है

अविनाश जोशी

Sunday, April 15, 2018

अतीत

अब तो ज्ञान का दीपक जलाना पड़ेगा
क्योकि
सन्त तो कहि ओर व्यस्त है

-अविनाश जोशी