तुम तो हमेशा हमसे जुदा हो
फिर यह कैसा सन्नाटा है
सन्नाटे से सन्नाटे की बात तो होती होगी
इन बातो में फिर से ऐसा वीराना सा क्यों है
सहरा में वीराना होना आम नज़र आता है
फिर भी इस सहरा में बगिया की आस सी क्यों है
पुष्प टहनी तना और पेड़ सब सब्ज़ है
फिर मेरे जीवन में अब प्यास सी क्यों है
सरसराहट पत्तो की जीवन में रस घोल देती है
फिर भी तुम जुदा हो ऐसी बात क्यों है
अविनाश जोशी
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