Friday, October 19, 2018

जुदाई

तुम तो हमेशा हमसे जुदा हो
फिर यह कैसा सन्नाटा है

सन्नाटे से सन्नाटे की बात तो होती होगी
इन बातो में फिर से ऐसा वीराना सा क्यों है

सहरा  में वीराना होना आम नज़र आता है
फिर भी  इस सहरा  में बगिया की आस सी क्यों है

पुष्प टहनी तना और  पेड़ सब  सब्ज़ है
फिर मेरे जीवन में अब प्यास सी क्यों है

सरसराहट पत्तो की जीवन में  रस घोल देती है
फिर भी तुम जुदा हो ऐसी बात क्यों है

अविनाश जोशी

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