मौन एक साधना है
लेकिन हर मर्ज की दवा है
शांत पानी मे कभी
जलजला नही आता
आराध्य की चुप्पी
आस्था का प्रतीक है
दुआ ओर नाराजगी
सब कुछ
मौन में ही निहित है
बस तिलिस्म है
स्वयम प्रतिमा
प्रतिरूप बदल बदल
सदैव मौन रहकर
शांत अलौकिक
आशीर्वाद की गंगा
बहाती रहती है।।
-अविनाश जोशी
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