Saturday, April 20, 2019

सहजता

सोचते थे
कभी ऐसा इंसान मिलेगा

जो 'जैसा' दिखता हो
'वैसा' ही होगा

लेकिन
यह सोचते सोचते
स्वयम में अपने आप को
तलाशने लगा हु
शायद अपने इंसान को
कसौटी पे लगा रखा है

आज अल सुबह अंधियारे में
घण्टियों  की आवाज़ के साथ
अनहोनी सी महसूस हुई
बगल के बाबा ने खुदकशी की थी

एक बार फिर सोच रहा हु
जो जैसा दिखता है
वैसा ही होता है क्या ?

-अविनाश जोशी

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