सोचते थे
कभी ऐसा इंसान मिलेगा
जो 'जैसा' दिखता हो
'वैसा' ही होगा
लेकिन
यह सोचते सोचते
स्वयम में अपने आप को
तलाशने लगा हु
शायद अपने इंसान को
कसौटी पे लगा रखा है
आज अल सुबह अंधियारे में
घण्टियों की आवाज़ के साथ
अनहोनी सी महसूस हुई
बगल के बाबा ने खुदकशी की थी
एक बार फिर सोच रहा हु
जो जैसा दिखता है
वैसा ही होता है क्या ?
-अविनाश जोशी
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